संगीत से संस्कार आ संस्कार से समाज के बारे में पता चलेला ! जब दुनिया पंडित रविशंकर के सुनेला ता वोकरा भारतीय संगीत, भारतीय संस्कार, आ भारतीय समाज के बारे में पता चलेला ! हमारा बहुत दुःख होला जब हम आजकल के भोजपुरी संगीत सुनेनी ! कौनो प्रकार से ई भोजपुरी संस्कार चाहे भोजपुरी समाज के तरह नइखे !

पईसा के दलदल में संगीत अईसन उलझ गईल बा की एकरा अच्छा बुरा के कौनो परवाह नईखे रह गईल ! गायक लोग ये ईहो नईखे बुझात की एकर केतना बुरा असर हमरा समाज पर पड़ रहल बा ! भोजपुरी भाषा के सारा शालीनता ख़तम कर देले बारा सन ई गाना ! आजकल भोजपुरी के मतलब फुहरपन आ अश्लीलता ही रह गईल बा !

अईसन बात नईखे की सब गायक लोग अईसने बा लेकिन अधिकता के कारण ईहे लोग ज्यादा प्रचलित बा ! हम आशा करा तानी की ये लोग बात समझ में आई आ ई लोग पईसा के चक्कर छोड़ के भोजपुरी संगीत पे ध्यान दी !

जब भोजपुरी गाना के बात होला त एगो गाना हमेशा याद कईल जाला, “कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया” ! बात चाहे गाँव जवार के होखे चाहे बात होखे प्रीत के, ई गाना हमेशा सबके जुबान पे रहेला ! सहमल सा मन, हल्का सा प्यार, थोडा सा गाँव के महक सबकुछ समेट्ले बा ई गाना !

 

कुछ दिन पहिले मनोज तिवारी के एगो गाना आइल रहे, “चलल कर ये बबुनी वोढ्नी संभाल के” ! मतलब बहुत सीधा बा ! आजकल के लईकी सन पर आधुनिकता के अइसन नशा सवार बा की पूछ मत ! सब केहू के कंगना रानौते बने के बा ! ई समस्या गाँव के लड़कियन में कुछ जादे ही बा ! कुछ दिन पहिले जब हम “फैशन” सिनेमा देखनी ता वोहू में ईहे देखईले बा ! 

गाँव समाज खातिर ई समस्या कुछ ज्यादा ही बड़ा हो गइल बा ! खास तौर में हमनी के भोजपुरी समाज में ! ई सब में दोष पूरा समाज के भी बा ! पहिले हमनी के गाँव में पूजा पाठ हवन कीर्तन भजन आदि हमेशा होत रहत रल ! सब लईका लड़की बुढ पुरनिया औरत मर्द सब लोग धर्म काम में लागत रहत रहे ! ई सब से सबके मन पवित्र होत रहे आ सबलोग शान्ती से जीवन जीयत रहे लोग ! अब गाँव में भी सबका घरे टीवी हो गइल बा आ सबकर मनोरंजन के साधन ईहे सब नाच गाना हो गइल बा ! अब लईका लड़की जईसन देखहिये सन ओइसने नु काम कर्हियेसन ! 

अब हमनी के जरूरत बा फेन से आपन जीवन व्यवस्था के ठीक कईला के ! आपन समाज आपन गाँव आ आपन धर्म के अच्छा से समझला के ! अगर हमनिके अभी से ई सब शुरू ना करेमसन त होत देर हो जाई !

बरसात के उ रात बस एगो सपना बन के रह गइल बा, अभीए अभीए हम ऑफिस से घरे पहुचल रहनी तबे एगो काल आइल | ई अइसन काल रहे जौना के हम चाह के भी अवोआएद ना कर सकत रहनी | हम ऑफिस के ही ड्रेस में आपन बाइक निकलनी आ चल देहनी | उ रात में बारीस कहत रहे की हम आज छोड़ के काल न बरसम | खैर केहुन्गा बारीस में भींगते भान्गते हम उहाँ पहुच गईनी | रात के ग्यारह बजत रहे, सड़क सुनसान भइल रहे आ उन्हवे बिल्डिंग के निचे एगो कोना से हल्का सा सिसकी के आवाज़ आवत रहे |

हम चुपके से जाके बगल में बईठ गईनी | करीब दस मिनट बाद सिसकी थोडा कम भईल, सर हल्का से उपर उठल | हमरा कुछ कहे से पहीले ही आवाज़ आइल, “रउवा कब अइनी हाँ?” हम कहनी बस थोड़े देर पहीले | फिर कुछ देर खातिर सन्नाटा छा गइल | थोड़े देर में हमही शुरू कईनी बात, थोडा बहुत आपन ऑफिस के बात करे लगनी | हमार मकसद उ माहौल के थोडा सा हसनुमा बनावे के रहे | कुछ देर में हम कामयाब भी हो गईनी | जब हमरा सबकुछ ठीक लागेलागल त हम घरे खातिर निकले लगनी |

रात के बारह बजत रहे आ बरखा भी थोडा कम हो गईल रहे | हम जईसे आपन बाइक स्टार्ट कईनी हमरा थोडा ठंढा लागल, तब हमरा भुझाइल की हम एक घंटा से पूरा भिजले बैठल रहनी | हमार कपडा, चमड़ा के जूता आ ईंहा तक की अंदर के सारा कपडा भी भीज गईल रहे | हम जल्दी जल्दी घरे अइनी, कपड़ा बदलनी | थोडा गरम पानी से देह पोंछनी | रात भी काफी हो गईल रहे त थोडा सा कुछो खा के सुते चल दनी |

बिस्तर पे चल त गईनी लेकिन हमरा नींद ना आवतरहे | हम सोचे लगनी की हम एतना सबकुछ कईसे क देनी हां, हम एक घंटा से ज्यादा भीजल रहनी लेकिन हमरा कुछो पता ना चलल |

जबे भोजपुरी संगीत के बात होला एगो गाना सबका जुबान पे आ जाला, “गंगा किनारे मोरा गाँव हो” ! हमहू अपना ब्लॉग के शुरुवात एही गाना से करे के चाहतानी ! ई गाना में एगो अइसन कशिश बा की ई सबका के अपना गाँव अपना जवार के तरफ खींचेला ! भोजपुरिया गाँव के जइसन बखान ये गाना में कईल बा ओइसन बखान कही अउर मिलल मुसकिल बा ! जब हमनी के अपना देश अपना जवार से दूर रह के ई गाना सुनेली सन ता हमनी के आँख में आंसू आ जाला ! 

 

बहुत खोजला के बाद भी हमरा एकोगो अच्छा भोजपुरी ब्लॉग न मिलल ता हम सोचनी की चला हमही शुरू क दे तानी एगो धमाकेदार भोजपुरी ब्लॉग ! हम ईहा कोशिश करें की अच्छा अच्छा बिषय पर आपन बात आपना भाषा में लिखी ! हम ईहो आशा करा तानी की रउवा लोग हमरा ई प्रयाश के सराहेम !!!

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